चाणक्य नीति हिन्दी में :- अध्याय ग्यारहवां 1. यद्यपि मेरी बुद्धि देववाणी में श्रेष्ठ है, तब भी मैं दूसरी भाषा का लालची हूं। जैसे अमृत

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