बेहोशी ( मूर्च्छा ) : बेहोशी के कारण, लक्षण और उपचार

बेहोशी के कारण व लक्षण

इस रोग में व्यक्ति अचानक ही बेहोश हो जाता है। जब किसी व्यक्ति को सुख दुख या अन्य किसी तरह की परेशानी का अनुभव करने की सामर्थ्य नहीं रहती और वह चलते फिरते या उठते बैठते अचानक ही आंशिक रूप से या पूर्ण रुप से संज्ञाहीन हो जाता है तो इस अवस्था को ही मूर्च्छा या बेहोशी के नाम से पुकारा जाता है यह रोग आकस्मिक भय, अधिक मधपान, मासिक चक्र की रुकावट अनियमित आहार, अत्याधिक जिंता व दुर्बलता व विषपान के कारण होता है। मूर्च्छा ग्रस्त रोगी की नाड़ी व श्वास की गति सामान्य बनी रहती हैं।

उपचार

आंवला : आंवले के रस के साथ घी पकाकर रोगी को पिलाने से मूर्च्छा दूर हो जाती हैं।

बेर : बेर को काली मिर्च, खस व नागकेसर के साथ समान मात्रा में मिलाकर महीन पीस लें। इस चूर्ण को काजल की तरह रोगी की आंखों में डालने से मूर्च्छा दूर हो जाती हैं।

खीरा : बेहोश हुए व्यक्ति को खीरा काटकर सुंघाने से भी बेहोशी दूर हो जाती हैं।

अनार : मूर्च्छा आने पर रोगी के मुंह में अनार का रस डालें।इससे काफी लाभ होगा।

सेव : रोज एक गिलास सेव का रस पीने से मूर्च्छा नही आती।

बादाम : रात्रि के समय दो बादामों को गलाकर उन्हें सुबह चबा चबाकर खाएं। इस उपचार को दो माह तक लगातार अमल मे लाने से चमत्कारी लाभ होगा।

 

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