मिर्गी : मिर्गी के कारण, लक्षण और उपचार – Murgi ke Karan Lakshan Aur Upchar

मिर्गी के कारण व लक्षण

स्नायु संबंधी रोगों में मिर्गी को सबसे भयानक माना जाता है। इस रोग में प्रायः याददाश्त समाप्त हो जाती है। रोगी ऐसा महसूस करता है मानो किसी अंधेरी सुरंग में घुसता चला जा रहा है। वह जमीन पर गिर पड़ता है, हाथ पैर तेजी से पटकता है। फिर चीखकर बेहोश हो जाता है। बेहोशी की स्थिति में रोगी की आंखें व भौहें टेढ़ी हो जाती हैं, मुंह से झाग व लार बहने लगते हैं। शरीर ऐंठ जाता है। रोगी को सांस लेने में अत्याधिक कठिनाई होती है वह दांंतों को घिसता है, चबाता है तथा दांतों से अपनी जीभ को काटता है। कुछ समय पश्चात ही रोगी होश में आता है।

उपचार

नींबू : चुटकी भर हींग को नींबू में मिलाकर चूसने से लाभ होगा।

शहतूत : प्रतिदिन 25 ग्राम शहतूत का रस पीने से मिर्गी के दौरे नहीं पड़ते।

सेव : सेव का रस पीना भी इस रोग में लाभदायक होता है। सेव का मुरब्बा भी रोग की तीव्रता में कमी करता है।

मुनक्का : प्रतिदिन मुनक्का का सेवन लाभप्रद रहता है।

आंवला व गाजर : गर्मियों के दिनों में प्रातः काल आंवले के मुरब्बे के साथ दूध व गाजर का रस मिलाकर पिए तो मस्तिष्क को तो बल मिलता ही है, मिर्गी की बीमारी में भी काफी फायदा होता है।

लीची : मिर्गी के रोगियों के लिए लीची का नियमित सेवन लाभकारी रहता है। इससे मस्तिष्क को शांति मिलती है।

 

 

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