पागलपन : पागलपन के कारण, लक्षण और उपचार – Pagalpan Ke Karan Lakshan Aur Upchar

पागलपन के कारण व लक्षण

इस रोग की गणना मानसिक रोगों में की जाती है। अत्यधिक चिंता, मोह, हर्ष, क्रोध,शोक अथवा विष का सेवन करने से यह रोग उत्पन्न होता है। कई बार कामवासना की अतृप्ति, मंदाग्नि आदि के कारण भी यह रोग उत्पन्न हो जाता है। जोर-जोर से चिल्लाना, कपड़े फाड़ना, रोना, हंसना, नींद ना आना, गिड़गिड़ाना, तोड़ फोड़ करना आदि लक्षण इस रोग में दिखाई देते हैं। इस रोग में रोगी का बल क्षीण हो जाता है तथा उसे नींद नहीं आती।

उपचार

अनार : 15 ग्राम अनार के पत्ते, 15 ग्राम ताजी गुलाब के फूल को मिलाकर लगभग 500 ग्राम पानी में इतना उबालें  कि पानी एक चौथाई रह जाए, फिर इसे छानकर इसमें 20 ग्राम घी मिलाकर नित्य पिएं। यह पेय पागलपन को दूर करने के लिए चमत्कृत औषधि सिद्ध होगा।

तरबूज : पागलपन के लक्षणों वाले रोगी को प्रतिदिन तरबूज का सेवन कराएं। लाभ मिलेगा।

अमरुद : सुबह-शाम 250 ग्राम अमरूद खाएं। यह क्रम लगभग 6 से 7 सप्ताह तक जारी रखें। स्वाद के लिए इसमें नीबू व काली मिर्च भी मिला सकते हैं। इससे इस रोग में काफी लाभ मिलेगा।

फलों का रस : पागलपन के लक्षणों वाले रोगी को नियमित रूप से फलों का रस पिलाना चाहिए। इससे उसकी मानसिक शक्ति बढ़ेगी तथा दिमाग में ताजगी बनी रहेगी। फलों के रस में गाजर, संतरा, मौसमी, अनन्नास व सेव का रस श्रेयस्कर रहता है।

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